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अध्याय 10 — विभूति योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् ।

असंमूढः स मर्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥3 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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