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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 51
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

दृष्टेवदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन।

इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥51 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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