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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 28
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् ।

न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥28॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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