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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 30
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।

तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥30॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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