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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 9
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

असक्तिरनभिष्वंगः पुत्रदारगृहादिषु ।

नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु ॥9 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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