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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 12
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा।

रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ ॥ 12 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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