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अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग

श्लोक 5
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

निर्मानमोहाजितसंगदोषाअध्यात्मनित्याविनिवृत्तकामाः ।

द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञैर्गच्छन्त्यमूढाः पदंव्ययं तत् ॥5॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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