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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 31
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यया धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च ।

अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी ॥31॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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