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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 68-69
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।

भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः।।68।।

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः।

भविता न च मे तस्माद्अन्यः प्रियतरो भुवि।।69।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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