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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 38
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।

तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ॥38॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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