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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 24
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च।

न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते ॥24॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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