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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 27
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च।

शाश्वतस्य च धर्मस्य सखस्यैकान्तिकस्य च ।। 27 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


अंतिम श्लोक
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