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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 2
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा ।

सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु ॥2॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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