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अध्याय 10 — विभूति योग

श्लोक 14-15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव।

न हि ते भगवन्व्यक्ति विदुर्देवा न दानवाः ॥14॥


स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम ।

भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥15॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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