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अध्याय 10 — विभूति योग

श्लोक 31-32
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् ।

झषाणां मकरश्चास्मि स्त्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥31॥


सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन ।

अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् ॥32॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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