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अध्याय 6 — आत्म संयम योग

श्लोक 1
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः ।

स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥ 1 ॥


🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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