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अध्याय 8 — अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 28
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव

दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम् ।

अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा

योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् ।। 28 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


अंतिम श्लोक
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