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अध्याय 8 — अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 10
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

प्रयाणकाले मनसाचलेन भक्त्यायुक्तो योगबलेन चैव।

ध्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक् स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥ 10 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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