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अध्याय 8 — अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 12-13
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च।

मूर्ध्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ॥12॥


ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।

यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥ 13 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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