भाषा चुनें:

अध्याय 8 — अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 27
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन।

तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥ 27 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top