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अध्याय 12 — भक्ति योग

श्लोक 13-14
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।

निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी ।। 13 ॥


सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।

मय्यर्पित मनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥14॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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