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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 33
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

किं पुनर्बाह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा।

अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥33॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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