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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 34
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।

मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥34॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


अंतिम श्लोक
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