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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ज्ञानयज्ञेन चाप्यन्ये यजन्तो मामुपासते।

एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ॥15॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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