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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 19
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान् ।

क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु ॥19॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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