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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 18
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः ।

मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥18॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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