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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 20
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि ।

मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ॥20॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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