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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता ।

भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥3॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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