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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 17
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमान मदान्विताः ।

यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ॥17॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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