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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 4
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च ।

अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् ॥4॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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