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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 12
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अभिसन्धाय तु फलं दम्भार्थमपि चैव यत् ।

इज्यते भरतश्रेष्ठ तं यज्ञं विद्धि राजसम् ॥12॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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