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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 25
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तदित्यनभिसन्धाय फलं यज्ञतपःक्रियाः ।

दानक्रियाश्च विविधाः क्रियन्ते मोक्षकांक्षिभिः ॥25॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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