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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 16
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः ।

भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते ॥16॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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