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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 1
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः ।

तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥1॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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