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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 14
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

देवद्विज गुरुप्राज्ञ पूजनं शौचमार्जवम् ।

ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते ॥14॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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