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अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 7
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

आहारस्त्विपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः ।

यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु ॥7॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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