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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 14-15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्।

तदोत्तमविदांलोकानमलान्प्रतिपद्यते ।। 14 ।।


रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसंगिषु जायते।

तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥ 15 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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