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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 22
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

श्री भगवानुवाच

प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव।

न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि कांक्षति ।। 22 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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