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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 21
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

कैर्लिंगैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो।

किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ।॥ 21 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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