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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 20
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान् ।

जन्ममृत्यु जरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ।। 20 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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