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अध्याय 5 — कर्म संन्यास योग

श्लोक 17
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठा स्तत्परायणाः ।

गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्भूतकल्मषाः ॥17॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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