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अध्याय 5 — कर्म संन्यास योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न कांक्षति ।

निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥3 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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