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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 17
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते ।

ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ।। 17 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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