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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 4
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् ।

ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः ॥4॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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