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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 16
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम्।

भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च ॥16॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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