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Chapter 1 Verse 17-18

अध्याय 1 — अर्जुन विषाद योग

श्लोक 17-18
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।

धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥17॥


द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते ।

सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ॥18॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

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