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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 25
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अनुबन्धं क्षयं हिंसामनवेक्ष्य च पौरुषम् ।

मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥25॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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