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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 58
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।

अथ चेत्त्वमहंकारान्न श्रोष्यसि विनंक्ष्यसि।।58।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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