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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 77
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः।

विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः।।77।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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