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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 57
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः।

बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव।।57।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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